रविवार, 15 जून 2008
देश के दुश्मन कौन
आज जब सारा देश अनेकों मुसीबतों में घिरा है वहीं हम एक दूसरे पर आरोप लगाकर अपना पल्ला झार रहें हैं। जब देश को हमारी आवश्यकता है हम अपने ही स्वार्थों में घिरे हैं। यह कहाँ तक जायज है। आज देश को ऐसे नागरिक की जरूरत है जो देश की भलाई के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दें। क्या आपमें वो दमख़म है। आज सभी को अपने में झांक कर देखने की जरूरत है। हम पाएंगे कि हमारा संसार अपने घर परिवार तक ही सिमटा है। ऐसे समय में लंबे चौरे उपदेशों से किसी समाज और राष्ट्र की भलाई असंभव है। आइये हम आप शपथ लें कि हम सिर्फ़ देश की मिटटी, हवा-पानी की ही बात करेंगे और वही सब कुछ करेंगे जिससे जन जन की भलाई हो। भले ही हमें अपने जीवन को ही न्योछावर क्यों न करना पड़े। आलोचना-समालोचना-दुर्भावना को तज कर हमें स्व से ऊपर उठकर अपने कर्म की आहूति देनी होगी। यह अश्वमेघ यग्य है दोस्तों, हमें अपनी आहुति देने के लिए तैयार होना है। इसके लिए हमें अपनी संकीर्णता को दूर करना होगा, हमें अपनी बुराइयों से ही लड़ना होगा। देशभक्ति की बात बहुत बाद की बात है. हमें अपनी स्वार्थ, बुराईयों की आहुति देनी होगी. आइये संकल्प लें.
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